अवधारणा ! शायद, चेतना का वो मूल तत्व, जो, वस्तु को उसके अर्थ तथा अर्थ को उस वस्तु के बिम्ब के साथ जोड़ती है और चेतना को, संवेदनात्मक बिम्बों से अलग, इक स्वतंत्र रूप से पहचानने की संभावना पैदा करती है !
मेरे आदरणीय ब्लॉगर दोस्तों से आग्रह है कि जो भी इस साझा मंच पर अपनी रचनाएं पोस्ट करना चाहते है, वो अपना E-mail ID भेजें।
आइए संग-संग गढ़ें अवधारणा ....